शामली। राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बेटियाँ फाउंडेशन द्वारा “बेटियाँ हैं तो भविष्य है” विषय पर एक जागरूकता एवं सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पचगांव एवं अंबेडकर शिक्षा सदन, गढ़ रोड स्थित प्राइमरी स्कूल में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में छात्राओं, शिक्षकों एवं समाजसेवियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना तथा उनके अधिकारों, शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर जागरूकता फैलाना रहा। इस अवसर पर बालिकाओं को शिक्षा के महत्व, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, लैंगिक समानता एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे अहम विषयों पर जानकारी दी गई।कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं ने कविताओं और अपने विचारों के माध्यम से यह सशक्त संदेश दिया कि “बेटियाँ बोझ नहीं, समाज की शक्ति हैं।” छात्राओं की प्रस्तुति ने उपस्थित सभी लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
संस्था की अध्यक्ष अंजु पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि जब एक बेटी शिक्षित और सशक्त होती है, तो पूरा परिवार और समाज प्रगति करता है। उन्होंने बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने पर ज़ोर दिया।इस अवसर पर माधवी, शालिनी, अंशु एवं रूही द्वारा प्रस्तुत नाटिका “सपना बेटी का” ने बाल विवाह मुक्त भारत का संदेश देकर सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित स्कूल की प्रिंसिपल मालती मैडम एवं अध्यापक श्री अनिल जी ने बालिकाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम के अंत में बेटियाँ फाउंडेशन द्वारा सभी बच्चों को उपहार स्वरूप स्टेशनरी, कॉपियाँ एवं खाद्य सामग्री वितरित की गई। यह आयोजन समाज को यह याद दिलाने का एक सार्थक प्रयास रहा कि बेटियों को समान अवसर, सम्मान और सुरक्षित वातावरण देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
✍️ ज़मीर आलम
विशेष संवाददाता
एनजीओ दर्पण – राष्ट्रीय समाचार पत्रिका
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