Monday, September 14, 2020

आखिर नियम और कानून जनता पर ही क्यों , नेताओं पर क्यों नहीं , देश की जनता मांगे जबाव


1- सभी सरकारी नौकरी के द्वारा अब संविदा पर रखे जाएँगे लोग ऐसा सरकार कहती हैं और पूरी  सैलरी नहीं दी जाएगी और हर छह माह पर  मूल्यांकन होगा और हर शाल यदि 60% से कम आये तो बाहर कर दिया जायेगा 

इसके पीछे तर्क है की सरकारी सेवा मे पारदर्शिता, जवाबदेही, बाबूगिरी खत्म होंगी 

ठीक देश हित मे अच्छा है लेकिन 

सिर्फ सरकारी नौकरी पर ही ये नियम क्यों लागू होगा ये सांसद और विधायक पर भी ऐसे नियम बनाये जाने चाहिए जैसे कि  निम्नलिखित हैं 

2- चुनाव के समय सांसद और विधायक से एक एग्रीमेंट पर सिग्नेचर करवाना चाहिए, कि यदि वे किसी अपराध, भ्रस्टाचार मे लिप्त पाए जायेंगे तो उनका चुनाव निरश्त हो जायेगा और यदि दुबारा ऐसी गतिविधियों मे लिप्त पाए जाते है तो पूरी उम्र चुनाव नहीं लड़ सकते 

3- सांसद और विधायक के लिए एजुकेशन क्वालिफिकेशन  विधायक के लिए इंटरमीडिएट मे 60% या ग्रेजुएशन क्वालीफाई होना अनिवार्य हो 

सांसद के लिए इंटरमीडिएट 60%, ग्रेजुएशन + परास्नातक क्वालीफाई , पोलिटिकल साइंस को प्रेफरेंस दिया जायेगा 

विभाग कि जानकारी रखने वाले को वरीयता दी जाएगी जैसे वित्त विभाग, शिक्षा विभाग, महिला से सम्बंधित विभाग, जेल प्रशासन.....  आदि 

सांसद और विधायक का हर छः माह पर जाँच होंगी हर वर्ष विभाग से सम्बन्ध मे जाँच होंगी और लोगों से फीडबैक लिया जायेगा फीडबैक मे फेल होने पर वो अपना पछ रख सकते है 

पुनः जाँच होंगी जाँच मे फेल होते है तो उन्हें अपना पद छोड़ना होगा उनकी जगह चुनाव मे हरे उमीदवार को मौका दिया जायेगा 

4- प्रधानमंत्री के लिए इंटरमीडिएट 60%, ग्रेजुएशन + परास्नातक क्वालीफाई , पोलिटिकल साइंस भारतीय समाज कि गहन जानकारी होनी चाहिए और हर वर्ष एक जाँच कमेटी जाँच करेंगी कि भारत के अंदर कि नीतियाँ और योजनाए कितनी सफल रही और विदेश नीति कैसी रही फेल रहने पर उनकी ही पार्टी के योग्य उमीदवार को मौका दिया जायेगा 

5- पीएचडी धारक सामाजशात्र मे, और भारतीय समाज कि गहन जानकारी और विदेश नीति कि अच्छी समझ हो,  भारतीय जनता के प्रति जवाबदेही होनी चाहिए कार्यकाल 5 वर्ष एक जाँच के बाद पुनः नमित किया जायेगा

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