Friday, June 5, 2020

वर्चुअल क्लासरूम अब न्यू नॉर्मल- शालिनी अवस्थी


कोरोना महामारी के कारण विश्व स्तर पर शिक्षा प्रणाली में इस वर्ष सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला है।इस कोरोनावायरस के प्रकोप ने छात्रों और शिक्षकों को स्कूल और कक्षाओं से बाहर होने के लिए मजबूर किया। स्कूल बंद होने से शिक्षा पर फुल स्टॉप लग गया है। इस दौरान सूचना और संचार प्रौद्योगिकी(आईसीटी) हमें शिक्षण और सीखने का एक नया तरीका या कहे एक मध्यम प्रदान करता है। पूरे भारत में प्राथमिक स्तर के छात्रों सहित लगभग सभी स्कूल अब नए सामान्य जिसको "वर्चुअल क्लासरूम या ई-लर्निंग" कहा जाता है के जरिए क्लासेज कर रहे है।ऑनलाइन कक्षाओं के शुरू होने के बाद,

शिक्षकों और अभिभावकों ने छात्रों को उनके स्वयं के शेड्यूल को पूरा करने में मदद की और शिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए पढ़ने और सीखने में उनकी रुचि को प्रेरित किया हैं।कई शिक्षक पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन, एनीमेशन क्लिप और प्री रिकार्डेड वीडियो का उपयोग कर रहे हैं क्योंकि यह सीखने में छात्रों के रूचि को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।शिक्षक अपने ऑनलाइन शिक्षण और प्रेजेंटेशन एवं एक्सप्लनैशन कौशल में लगातार सुधार कर रहे हैं।न केवल छात्र,बल्कि शिक्षक भी अब धीरे-धीरे ऑनलाइन टीचिंग की लय को अपना रहे हैं।

इसमें वर्चुअल क्लासेज को करने के लिए यूज़ मे होने वाले कुछ ऍप्स है , जैसे गूगल मीट, गूगल क्लासरूम, ज़ूम, व्हाट्सएप वीडियो कांफ्रेंसिंग, स्काइप इत्यादि का उपयोग करके कंप्यूटर और मोबाइल उपकरणों से पढ़ाई को जारी रखने मे सफलता मिली है।

वर्चुअल क्लासरूम के लाभ :

1) इससे सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करके कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने मे मदद मिली।
2) पढ़ाई को जारी रखा जा सका।पढ़ाई उतनी इफेक्टिव भले ही ना रही हो पर लर्निंग को कंटिन्यू रखा गया।
3) छात्रों  को एक नया लर्निंग एक्सपीरियंस मिला जिसमे उन्होंने शिक्षा के लिए ऑनलाइन डिवाइस का यूज़ जाना।
4) ज्यादा से ज्यादा लोग अब कम्यूटर एंड इंटरनेट फ्रैंडली हो गये है या हो रहे हैं।
5) बच्चों की पढ़ाई मे पेरेंट्स का ध्यान देना ।
6) ये समय का सही सदुपयोग साबित हुआ ।

वर्चुअल क्लासरूम के दुष्प्रभाव :

1) लम्बे समय तक मोबाइल एवं कंप्यूटर पर देखने से आँखों पर ज़ोर पड़ना ।
2) कुछ रिपोर्ट्स के अकॉर्डिंग ऑनलाइन क्लासेज के दबाव मे बच्चों मे अवसाद एवं स्ट्रेस को भी पाया गया ।
3) ऑनलाइन क्लास के बाद इ -वर्कबुक से होमवर्क करने तथा उसे फिक्स्ड समय के अंदर जमा  करने का प्रेशर ।
4) लम्बे समय तक ऑनलाइन डिवाइसेस के इस्तेमाल से बच्चों मे थकान का होना ।
5) जिन घरों मे कंप्यूटर नहीं  है या सिर्फ एक ही फ़ोन है और बच्चे 2 या 3 है उनकी एक ही समय पर क्लास का लगना और वो अटेंड ना कर पाना और क्लास का नुकसान होना ।
6) शिक्षिका और छात्रों के बीच मे काम इंटरेक्शन होना।
7) पेरेंट्स पर भी बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई  की मॉनिटरिंग का वर्क लोड बढ़ा ।

यह ऑनलाइन लर्निंग आने वाले समय के लिए विकास का प्रतिनिधित्व कर सकता है और अब एक न्यू नार्मल या कहे सामान्य जैसा हो गया है जिसको शिक्षिकाओं और छात्रों दोनों ने ही बहुत साहस,लगन और इंटरेस्ट से लिया है और जारी रखा है ।परतुं ये ऑनलाइन विकल्प कभी भी फिजिकल क्लासरूम को रेप्लस नहीं कर सकता । प्रतिदिन फेस टू फेस क्लासरूम के अलग ही महत्व हैं ।कक्षाओं में, शिक्षा एक सामाजिक प्रक्रिया है, जिसमें छात्रों को एक दूसरे के साथ इंटरेक्शन एवं व्यवहार करना सीखना होता है जो की वर्चुअल क्लासरूम से पॉसिबल नहीं है। स्कूल में एक छात्र के अनुभव उनके समाजीकरण के सबसे प्रभावशाली कारकों में से एक हैं जो की बहुत महत्वपूर्ण है ।

स्रोत- शालिनी अवस्थी (आईटी प्रोफेशनल एवं एडुकेटर)

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