Saturday, May 16, 2020

लॉकडाउन के दौरान शिक्षण संस्थानों से बेहतर शिक्षा कैसे दी जाये

यह तो सर्वविदित है कि ‘‘कोरोना’’ महामारी रूपी  आज समूचा विश्व डरा और सहमा हुआ है इसकी भयावहता से भी इन्कार
नहीं किया जा सकता किन्तु किसी भी परिस्थिति में जीवन सरिता के बहाव में अधिक समय तक ठहराव की स्थिति स्वीकार्य नहीं होती । यह भी एक शाश्वत सत्य है। ठहरा हुआ पानी दूषित और अप्रयोज्य होने में अधिक समय नहीं लेता। अतः आपसे निवेदन है कि कतिपय सावधानियां और सुरक्षा उपायों के साथ अन्य औद्योगिक/व्यवसायिक/पेशेवर संस्थानों की भांति शिक्षण संस्थानों को भी बिना छात्रां के एक तिहाई स्टॉफ टीचिंग/नॉन टीचिंग को स्कूल आने की अनुमति प्रदान करने का कष्ट करें।
जिस प्रकार बिना नींव के कोई भी इमारत भले ही वह कितनी भी सुन्दर एवं आकर्षक हो परन्तु टिकाऊ नहीं हो सकती एवं विषम परिस्थितियों का एक थपेडा भी उसे तहस-नहस करने के लिए पर्याप्त है। उसी प्रकार बिना शिक्षण के हमारा भावी समाज पंगु बनकर रह जायेगा। हालॉकि इस परिप्रेक्ष स्कूलों द्वारा में ऑन-लाइन शिक्षण कार्य कराया जा रहा है। यद्यपि स्कूलां में बिना छात्रों के कुल स्टॉफ का एक तिहाइ स्टॉफ उपस्थित होकर काम करें तो निम्न समस्याओं का समाधान हो सकता है :-
1- शिक्षकों के घर पर संसाधनों की अपेक्षाकृत कमी के चलते अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो पा रहे है। उपस्थित टेक्निकल स्टॉफ एवं सबजेक्ट विशेषज्ञ शिक्षक वर्क एट होम पर कार्यरत शिक्षकों को टेक्निकल/शैक्षणिक/सोफ्टवेयर स्पोर्ट दे सकेंगे जिससे छात्रों को बेहतर शिक्षा दी जा सकें। 
2- ऑनलाइन लाइव क्लास में इंटरनेट स्पीड़ और नेटवर्क जैसी समस्या उत्पन्न हो रही है। जिस कारण बच्चां व शिक्षकों की विड़ियों सफरिंग करते हुए बीच में ही रूक जाती है। अनेक शिक्षकों के पास इन्टरनेट तो है पर वाई-फाई नहीं है, मोबाइल डाटा पर्याप्त कार्य नहीं कर पाता शिक्षक को 10 मिनट की विडियों बनाने में एक से डेढ जीबी डेटा लग जाता है। स्कूलों में पहले से ही फास्ट वाई-फाई उपलब्ध है जिससे यह समस्या हल हो जाती है।
3- जो अध्यापक ट्रेनिंग के अभाव में ऑनलाइन एजुकेशन नहीं करा पा रहे हैं। उन्हें तिहाई स्टॉफ उपस्थिति के अर्न्तगत स्कूल बुलाकर, स्कूल द्वारा ऑनलाइन एजुकेशन की ट्रेनिंग दी जायें, तो उनके लिए ऑनलाइन पढ़ाना सम्भव हो जायेगा।
4- स्कूल की लाइब्रेरी में सभी विषयों की विशेषज्ञ पुस्तके उपलब्ध रहती है उपस्थित एक तिहाई शिक्षकां की मदद से ऑनलाइन शिक्षा दे रहे शिक्षक, पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों की सहायता से ऑनलाइन शिक्षा अधिक अच्छी करा सकेंगे।
5- विद्यालय में कम्प्यूटर, लैपटाप, प्रोजेक्टर, प्रिन्टर एवं सोफ्टवेयर से सम्बन्धित सुविधाएं भी होती है। इनके प्रयोग से छात्रां को शानदार ऑनलाइन क्लास प्रदान की जा सकती है जबकि घर पर शिक्षकों के पास केवल मोबाइल फोन है जिससे पूर्ण क्लास चलाना मुश्किल है।
6- घर से विड़ियों बनाते समय कैमरा हिलता रहता है एवं कैमरा/मोबाइल की क्वालिटी भी उतनी अच्छी नहीं होती है, जिससे विद्यार्थी को व्यवधान उत्पन्न होता है । लगभग सभी स्कूलों के 5 कमरों से 30 कमरों तक में पूर्व से ही स्मार्ट क्लास है वहां केमरा, प्रोजेक्टर, सोफ्टवेयर, व्हाइट बोर्ड आदि परिपूर्ण है अर्थात् ऑनलाइन क्लास का पूरा इन्फ्रास्टक्चर तैयार है बस शिक्षक को क्लास रूम में जाना है और ऑनलाइन शिक्षा शुरू हो जाती हैं।
7- ऑनलाइन क्लास में घर पर रोशनी की भी समस्या होती है जितना प्रकाश ऑनलाइन क्लास/विडियों रिकार्डिंग में आवश्यक होता है ऑनलाइन क्लास के लिए वह पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलता, जिस कारण बच्चों को स्पष्ट दिखाई नहीं देता जबकि स्कूल में प्रकाश व्यवस्था आवश्यकतानुसार बनाई जा सकती है । 
8- शिक्षक स्कूल में फ्री माइंड होकर अच्छी आवाज के साथ पढ़ा सकते है, घर पर शिक्षक आवाज के साथ नहीं पढ़ा सकते क्योंकि सभी परिवार के साथ रहते हैं। कमरा बन्द करने से आवाज गूंजने लगती है।  घर पर कुछ घर वालां का व कुछ आस-पास वालों की आवाज आती रहती है, जो बच्चों को पढ़ाने में समस्या उत्पन्न करती है। शिक्षक का मन स्थिर नहीं रहता है जिस कारण गलती होने की संभावना बढ़ जाती है। स्कूल में बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए शिक्षकां को शान्त वातावरण मिलेगा।
9- लेंगवेज जैसे विषय को जैसे- हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत आदि को मोबाइल को कहीं पर भी ले जाकर पढ़ा सकते है लेकिन गणित, फिजिक्स/केमेस्ट्री/बॉयोलाजी/कम्प्यूटर जैसे विषय बिना बोर्ड के पढाना मुश्किल है। बोर्ड पर ही वह हर फॉर्मेट को और सवालों को आसानी से समझा सकते है।
10- बच्चें किन्ही कारणवश ऑनलाइन क्लासेज नहीं ले पा रहे हैं, उनके लिए उपस्थित एक तिहाई अध्यापक लिखित नोट्स तैयार कर सकते हैं, जिन्हें बाकी उपस्थित क्लेरिकल स्टॉफ के माध्यम से बच्चों के घर भेजा जा सकता है।
उपरोक्त सभी कार्यो के लिए विद्यालय में अध्यापकों की उपस्थिति की अति आवश्यकता है। परन्तु कोरोना वायरस के फैलाव को देखते हुए विद्यालय में 100 प्रतिशत स्टॉफ मौजूद रहना भी उचित नहीं है। लगभग सभी विद्यालयों में शिक्षक-कमरा 2 : 1 के अनुपात में है। अतः विद्यालय में एक तिहाई स्टॉफ की मौजूदगी से टीचर्स कम कमरे ज्यादा होगे इससे सभी टीचर्स अलग-अलग कमरों में ये सब कार्य कर सकते हैं। जिससे कि छात्रों की शिक्षा व्यवस्था भी बाधित न हो और सरकार के निर्देशों का भी पालन किया जा सकें और कोविड-19 को फैलने से रोका जा सकें । 
भवदीय,
(अरविन्द संगल)
चेयरमैन,
सेन्ट आर. सी. ग्रुफ ऑफ एजुकेशनल इंस्टीटयूट शामली

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