Tuesday, February 3, 2026

चंबल विकास यात्रा 2026: संरक्षण, विकास और राष्ट्रीय एकता का संकल्प

नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता में , राष्ट्रीय संयोजक , ने आगामी चंबल विकास यात्रा की औपचारिक घोषणा की। यह यात्रा 20 फरवरी 2026 से 1 मार्च 2026 तक के उद्गम से संगम तक आयोजित की जाएगी और मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश—तीनों राज्यों से होकर गुजरेगी।

यात्रा का उद्देश्य

इस यात्रा का मूल लक्ष्य चंबल नदी के संरक्षण, बीहड़ क्षेत्रों के समग्र विकास, जल-जागरण और क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहरों के प्रचार के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है। चंबल को देश की अपेक्षाकृत प्रदूषण-मुक्त प्रमुख नदियों में गिना जाता है, जो यमुना में मिलकर गंगा की जलधारा को सुदृढ़ करती है।

प्रमुख गतिविधियाँ

यात्रा के दौरान ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का दौरा, शिव मंदिरों में पूजन, स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों का सम्मान, बीहड़ क्षेत्रों में संवाद और ग्रामीण समुदायों से सीधा संपर्क शामिल रहेगा। साथ ही राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में जैव-विविधता संरक्षण—विशेषकर घड़ियाल एवं गंगा डॉल्फिन संरक्षण—पर भी विशेष फोकस रहेगा।


चंबल विकास समिति की प्रमुख मांगें और संकल्प

  • चंबल नदी बेसिन के संरक्षण व विकास हेतु विशेष बजट और राष्ट्रीय स्तर की नीति
  • बीहड़ क्षेत्रों में सिंचाई, कृषि, मत्स्य पालन और रोजगार सृजन के लिए विशेष योजनाएँ।
  • क्षेत्रीय पिछड़ेपन को दूर करने हेतु आर्थिक विकास पैकेज
  • चंबल घाटी में शांति, सामाजिक सद्भाव और सुरक्षा के लिए ठोस पहल।
  • राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य व जैव-विविधता संरक्षण को मजबूत करना।
  • स्वतंत्रता सेनानियों—कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया एवं पंडित राम प्रसाद बिस्मिल—की स्मृतियों के सम्मान में स्मारक और जागरण कार्यक्रम।
  • तीनों राज्यों के बीच समन्वय से चंबल बेसिन प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना।

यात्रा का संक्षिप्त रूट प्लान (हाइलाइट्स)

  • 20 फरवरी: जनापाव कुटी (महू के पास, उद्गम) से उद्घाटन; रात्रि—उज्जैन (महाकालेश्वर)।
  • 21 फरवरी: उज्जैन → मंदसौर (पशुपतिनाथ) → रतलाम।
  • 22 फरवरी: रतलाम → चित्तौड़गढ़ (गांधी सागर बांध क्षेत्र)।
  • 23 फरवरी: चित्तौड़गढ़ → कोटा (राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर)।
  • 24 फरवरी: कोटा → करौली (करौली माता)।
  • 25 फरवरी: करौली → धौलपुर (चंबल पार) → मुरैना।
  • 26 फरवरी: मुरैना → पोरसा → ग्राम फुल सहाय का पूरा (रात्रि संवाद)।
  • 27 फरवरी: ग्राम फुल सहाय का पूरा → पिनाहट → बटेश्वर (प्राचीन मंदिर समूह) → बाह।
  • 28 फरवरी: बाह → उदी मोड़।
  • 1 मार्च: उदी → चकरनगर → पचनदा संगम (दोपहर 2 बजे समापन व सांस्कृतिक कार्यक्रम)।

वक्तव्य

प्रेस वार्ता में ठाकुर जोगिंद्र सिंह भदौरिया ने कहा—

“चंबल विकास यात्रा केवल एक पदयात्रा नहीं, बल्कि चंबल को प्रदूषण-मुक्त रखने, बीहड़ क्षेत्रों के विकास और तीन राज्यों में सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का सामूहिक संकल्प है। हम केंद्र और राज्य सरकारों से अपेक्षा रखते हैं कि वे इन मांगों पर त्वरित ध्यान दें, ताकि चंबल को राष्ट्र की जीवन-रेखा के रूप में स्थापित किया जा सके।”


संस्था परिचय

चंबल विकास समिति एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो चंबल नदी बेसिन के संरक्षण, जल-जागरण, सांस्कृतिक संरक्षण और ग्रामीण उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है।


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नई दिल्ली से पत्रकार ऊषा महाना की विशेष रिपोर्ट

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