Sunday, June 5, 2022

गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र द्वारा अपने मुख्यालय 15/239 सिविल लाइंस कानपुर में संपूर्ण क्रांति दिवस की 48 वीं वर्षगांठ मनाई गई ,


संपूर्ण क्रांति के नायक जयप्रकाश नारायण के शब्दों में संपूर्ण क्रांति में 7 क्रांतियां शामिल है। राजनैतिक ,आर्थिक ,सामाजिक,बौद्धिक, सांस्कृतिक ,शैक्षणिक व अध्यात्मिक क्रांति शामिल है। विषय प्रवेश करते हुए खादी ग्राम उद्योग संघ के अध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने कहा कि पटना के ऐतिहासिक मैदान में पांच लाख (500000) की ऐतिहासिक भीड़ जुड़ चुकी थी , जिसमें जेपी ने संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया था ,

जिसमें जात पात ,भेदभाव ,तिलक ,दहेज न लेने का संकल्प लिया गया था। गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्री दीपक मालवीय ने कहा कि आज यदि संपूर्ण क्रांति की अवधारणा को जीवंत रखना है, तो हमें बलिदान करना होगा ,कष्ट सहना होगा, गोली और लाठियों का सामना करना होगा । यह बड़ा कठिन काम है, करोड़ों कि आबादी वाले इस देश में हजारों भाई-बहनो की जरूरत होगी ,

जो संपूर्ण क्रांति के लिए अपने को कुर्बान कर सके । पूर्व पार्षद मदनलाल भाटिया ने कहा कि  संपूर्ण क्रांति एक आंदोलन है ,एक अभियान है ।हमें अपनी शक्ति भर योगदान अर्पित करना है ,आज संपूर्ण क्रांति के सपनों के विपरीत समाज बन रहा है। समाज में भाषा, प्रांत, जातीयता सांप्रदायिकता का बोलबाला है । जे. पी .की क्रांति से लोग उनके सपनों को अंजाम  न दे सके । संगोष्ठी में, फारूख भाई, श्री कमल कांत तिवारी बिंदा भाई अनिल सोनकर, श्री कुलदीप सक्सेना कैलाश नारायण त्रिपाठी जय नारायण गुप्ता आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।   कार्यक्रम का संचालन मंत्री बिंदा भाई ने किया और कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री कैलाश नाथ त्रिपाठी जी ने की ।

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